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रविवार, 1 फ़रवरी 2026

संत रविदास जयंती 2026: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में 649वीं जयंती पर कार्यक्रम

 हिसार 1  फरवरी



चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के सभागार में हकृवि एवं सामाजिक समरसता मंच के सौजन्य से संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे जबकि विशिष्ठ अतिथि डॉ. अम्बेडकर सभा, हिसार के प्रधान रघुवीर सुंडा एवं मुख्य वक्ता के तौर पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा के प्रो. नन्दकिशोर मौजूद रहें। मंच पर हकृवि के कुलसचिव डॉ पवन कुमार भी उपस्थित रहें।


कुलपति प्रो काम्बोज ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज हम सभी एक महान संत, समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के अग्रदूत संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन केवल एक संत की जयंती का नहीं, बल्कि समानता, मानवता, भाईचारे और सामाजिक समरसता के उन महान विचारों को स्मरण करने का दिन है जिन्हें संत रविदास जी ने अपने जीवन में सिद्ध किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास का जन्म ऐसे समय में हुआ जब समाज जात-पात, ऊ ंच-नीच और भेदभाव की बेडिय़ों में जकड़ा हुआ था। उन्होंने अपनी वाणी और भक्ति के माध्यम से यह संदेश दिया कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके कर्म, विचार और मानवता से होती है। उन्होंने कहा था - मन चंगा तो कठौती में गंगा- यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन का महान दर्शन है जो हमें बताता है की पवित्रता बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर होती है।


प्रधान रघुवीर सुंडा ने बताया कि संत रविदास का पूरा जीवन सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करने में व्यतीत हुआ। उन्होंने समाज मे एकता व प्रेम का मार्ग दिखाया और बताया कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग भक्ति है, जो करुणा और सेवा से होकर जाता है। संत रविदास के विचार वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे।


मुख्य वक्ता प्रो. नन्दकिशोर ने कहा कि संत रविदास का एक सपना था कि वे एक ऐसा समाज, जहां कोई भेदभाव ना हो, सबको समान अवसर मिले, और हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार हो। संत रविदास जी ने हमें सिखाया कि समाज में समरसता तभी आएगी जब हम एक दूसरे के प्रति प्रेम सम्मान और भाईचारा बनाकर रखेंगे। हमें उनके बताएं मार्ग पर चलकर जात-पात और भेदभाव जैसी बुराइयों को खत्म करना होगा।


हकृवि के कुलसचिव एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ पवन कुमार ने विचार गोष्ठी में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि संत रविदास की जंयती मानवता, प्रे्रम व भाईचारे का प्रतीक है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में संतों और महापुरूषों की जंयती इसलिए मनाई जा रही है ताकि लोग उनके आर्दशों एवं विचारों से प्ररेणा लेकर समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। मंच का संचालन हकृवि के सहायक वैज्ञानिक डॉ सतपाल ने किया। सामाजिक विकास मंच के विश्वविद्यालय आयाम प्रमुख डॉ विकास वर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, अधिकारी, सामाजिक समरसता मंच के जिला संयोजक डॉ राम निवास, सह-संयोजक महेन्द्र सहित कर्मचारी व छात्र उपस्थित रहें।
फोटो कैप्शन: 1. मंच पर उपस्थित मुख्यातिथि कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज व अन्य
2-3. विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्यातिथि
4. विचार गोष्ठी में उपस्थित श्रोतागण


 



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